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रासायनिक के बारे में

परिचय

रसायन आधुनिक जीवन के अनिवार्य और अभिन्न अंग हैं, जो मानव कार्यकलाप के लगभग सभी क्षेत्रों को छूते हैं। रसायन उद्योग बढ़ती भारतीय अर्थव्यवस्था का एक बहुत ही महत्वपूर्ण घटक है और यह देश के औद्योगिक और कृषि विकास का मुख्य आधार है, जो कपड़ा, कागज, पेंट, साबुन और डिटर्जेंट फार्मास्यूटिकल, कृषि रसायन इत्यादिसमेत कई उद्योगों के लिए कई बिल्डिंग ब्लॉक और कच्चा माल प्रदान करता है। । रसायनों की प्रति व्यक्ति खपत विश्व औसत का लगभग दसवां हिस्सा है जो दर्शाती है कि संभावित मांग अभी तक उत्परन्नख होनी शेष है। प्राकृतिक गैस, बेंजीन, टोलुइन, ज़िलीन, नेफ्थालेन (बीटीएक्सएन), इथिलीन, प्रोपीलीन, फॉस्फोरस, सामान्य नमक, सल्फर आदि रसायनों के निर्माण के लिए मुख्य कच्चे माल हैं।

2. एक नज़र में रसायन क्षेत्र:

  • रसायन क्षेत्र बढ़ती भारतीय अर्थव्यवस्था का एक बहुत ही महत्वपूर्ण घटक है।
  • वस्त्र, कागज, पेंट, साबुन और डिटर्जेंट, फार्मास्यूटिकल्स, कृषि रसायन इत्यादि सहित कई उद्योगों के लिए कई बिल्डिंग ब्लॉक और कच्चे माल प्रदान करता है।
  • विश्वा रसायन बाजार (उर्वरक और फार्मास्यूटिकल्स समेत) का आकार 2017 में लगभग 5.0 ट्रिलियन डॉलर था। वर्तमान में भारतीय रसायन उद्योग का विश्व रसायन बाजार में लगभग 3% हिस्सा है।
  • 2017-18 में भारतीय रसायन उद्योग (उर्वरक और फार्मास्यूटिकल्स समेत) का आकार 163 अरब डॉलर है। इसका रैंक दुनिया में 6 वें स्थान पर और एशिया में चौथे स्थान पर है।
  • विश्व रसायन निर्यात (फार्मास्युटिकल उत्पादों को छोड़कर) में भारत 17 वें स्थान पर है और विश्व रसायन आयात (फार्मास्युटिकल उत्पादों को छोड़कर) में 7 वें स्थान पर है।
  • 2016-17 में कुल राष्ट्रीय निर्यात में रसायन और पेट्रोरसायन के निर्यात का हिस्सा 10.3% है।
  • 2016-17 में कुल राष्ट्रीय आयात में रसायन और पेट्रोरसायन के आयात का हिस्सा 10.2% है।

विश्व रसायन उद्योग में एशिया के बढ़ते योगदान के साथ, भारत दुनिया भर में रसायन कंपनियों के लिए फोकस गंतव्यों में से एक के रूप में उभरा है। भारतीय रसायन उद्योग वैश्विक रसायन उद्योग का ~ 3% है। उद्योग और सरकार की समेकित पहल से भारतीय रसायन उद्योग दहाई के अंक की दर से बढ़ सकता है। हालांकि, उद्योग और अधिक बढ़ने की इच्छा रख सकता है और इसकी विकास क्षमता केवल इसकी आकांक्षाओं से ही सीमित है। विनिर्माण में भारत की बढ़ती प्रतिस्पर्धात्मकता पर विचार करते हुए भविष्य में इसमें और आगे बढ़ने की सामथर्य है। विभाग उच्च विकास दर हासिल करने के लिए आवश्येक निवेश की सुविधा के लिए पहल कर रहा है।

भारत में रसायन क्षेत्र में निवेश को आकर्षित करने के लिए विकसित भूमि सहित विश्व स्तरीय बुनियादी ढांचा, ठोस अपशिष्ट निपटान और भस्मीलकरण सुविधाओं के साथ आम उत्सगर्जन शोधन सुविधाएं बहुत महत्वपूर्ण हैं। रसायन उद्योग के विभिन्न हिस्सों (जैसे कार्बनिक रसायन, विशेषता रसायन, क्लोर-क्षार, कीटनाशक, रंगीन और शराब आधारित रसायन) के अपने स्वयं के चुनौतियों के अनूठे सेट हैं। उद्योग की वृद्धि केवल तभी हो सकती है जब ये व्यक्तिगत हिस्सेस अपनी चुनौतियों को दूर करें और विकास पथ के साथ तेजी से आगे बढ़े। विभाग चुनौतियों का समाधान करने और शीर्ष प्राथमिकता के साथ इस क्षेत्र के त्वरित विकास को सुकर बनाने के लिए सभी आवश्यक उपाय कर रहा है।

3. रसायन क्षेत्र के लिए विकास चालक:

  • विशाल जनसंख्याा, कृषि पर बहुत अधिक घरेलू बाजार निर्भरता और मजबूत निर्यात मांग उद्योग के लिए प्रमुख विकास चालक हैं।
  • विश्व रसायन विनिर्माण हब के रूप में एशिया की ओर एक वैश्विक विस्थानपन।
  • पश्चिमी देशों की तुलना में भारत में रसायनों की प्रति व्यक्ति खपत कम है, इसलिए नए निवेश के लिए बहुत अधिक गुंजाइश है।
  • सकल घरेलू उत्पाद और क्रय शक्ति में वृद्धि से घरेलू बाजार के लिए बड़ी विकास क्षमता उत्पन्न होती है।
  • रसयनों की विशेषज्ञता और ज्ञान जैसे नए विषयों पर फोकस।
  • कुशल विज्ञान पेशेवर।
  • विश्व स्तरीय इंजीनियरिंग और मजबूत आर एंड डी क्षमताएं।

रसायनों के लिए कुछ प्रमुख बाजार उत्तर अमेरिका, पश्चिमी यूरोप, जापान और एशिया और लैटिन अमेरिका में उभरती अर्थव्यवस्थाएं हैं। अमेरिका वैश्विक रासायनिक खपत के लगभग पांचवें हिस्से की खपत करता है जबकि लगभग आधी खपत के साथ यूरोप सबसे बड़ा उपभोक्ता है। अमेरिका कमोडिटी रसायनों का सबसे बड़ा उपभोक्ता है जबकि एशिया पसिफिक कृषि रसायन और उर्वरकों का सबसे बड़ा उपभोक्ता है।

4. अनुसंधान और विकास (आरएंडडी)

रसायन क्षेत्र अत्यगधिक विविधतापूर्ण है जिसमें कार्बनिक, इन-ऑर्गेनिक्स, डाइस्टफ्स, कीटनाशक, पेंट्स, साबुन और पेट्रोरसायन इत्यादि जैसे कई भाग शामिल हैं। इस क्षेत्र के विकास और वृद्धि के लिए अनुसंधान और विकास सबसे महत्वपूर्ण हैं। उद्योग के हिस्से में निरंतर आरएंडडी प्रयासों से उनके गुणवत्ता मानकों में सुधार करने, उच्च प्रतिफल प्राप्त करने के परिणामस्वरूप उत्पादन लागत में कमी और अंतर्राष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धी बढ़त प्राप्तह करने में मदद मिलती है। विदेशों में बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा 9-10% के मुकाबले भारतीय रसायन उद्योग आरएंडडी पर अपने कुल कारोबार का लगभग 2-3% खर्च करता है। इसलिए, अंतर्राष्ट्रीय रसायन उद्योग से प्रतिस्पर्धा का सफलतापूर्वक सामना करने के लिए उद्योग को आरएंडडी में बड़ा निवेश करना होगा। भारत में कई वैज्ञानिक संस्थान हैं और देश की ताकत इसके अत्यधिक प्रशिक्षित वैज्ञानिक जनशक्ति के विशाल पूल में निहित है।

रासायनिक क्षेत्र के संवर्धन के लिए रसायन एवं पेट्रोरसायन विभाग की पहलें:


रसायन एवं पेट्रोरसायन विभाग निम्नलिखित उपायों के माध्यम से रासायनिक क्षेत्र के विकास और संवर्धन के लिए सुविधा प्रदाता के रूप में कार्य करता है:

  • सीमा शुल्का के युक्तिटकरण की सिफारिश करना अर्थात्, बुनियादी फीडस्टॉक्स पर न्यूनतम सीमा शुल्कम उपांतिम इंटरमीडिएट पर थोड़ा अधिक सीमा शुल्कर, तैयार उत्पादों पर उच्च कस्टम शुल्क की सिफारिश करना।
  • घरेलू मूल्यवर्धन को प्रोत्साहित करने के लिए उलटा शुल्कर संरचना की विसंगतियों को हटाने की सिफारिश करना।
  • अवांछनीय सस्ते आयात के विरुद्ध सुरक्षा प्रदान करने के लिए, डब्ल्यूटीओ मानदंडों के अनुसार सेफगार्ड ड्यूटी और एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाने की सिफारिश करना।
  • हितधारक परामर्श के बाद, विभिन्न द्विपक्षीय/बहुपक्षीय मुक्त व्यापार समझौतों पर विभाग के ठोस विचार बनाना।
  • प्रतिबंधित वस्तुओं के व्यापार से संबंधित मामलों में डीजीएफटी को टिप्पणियां प्रस्तुत करना।
  • अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों के संदर्भ में उद्योग को अपने दायित्वों के अनुपालन में सुविधा प्रदान करना।
  • रासायनिक क्षेत्र में वृद्धि के लिए हरित रसायन/प्रक्रियाओं, रासायनिक सुरक्षा, विचारों और प्रौद्योगिकी के आदान-प्रदान आदि को बढ़ावा देने के लिए अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों, संगोष्ठियों, रासायनिक प्रदर्शनियों आदि को आयोजित करने के माध्यम से भारतीय रासायनिक उद्योग की ताकत दिखाने के लिए गतिविधियों का संचालन करना।

5. डाइस्टफ उद्योग

डाइस्टफ सेक्टर भारत में रसायन उद्योग के महत्वपूर्ण हिस्सों में से एक है, जो कपड़ा, चमड़े, कागज, प्लास्टिक, प्रिंटिग स्याही और खाद्य पदार्थों जैसे विभिन्न क्षेत्रों के साथ आगे और पीछे से जुड़ा हुआ है। कपड़ा उद्योग में डाइस्टफ्स की सर्वाधिक खपत होनी है। 1950 के दशक में आयातकों और वितरकों की भूमिका अब यह एक बहुत मजबूत उद्योग और एक प्रमुख विदेशी मुद्रा अर्जित करने वाले क्षेत्र के रूप में उभरा है। भारत डाइस्टफ और डाई इंटरमीडिएट्स, खासतौर पर प्रतिक्रियाशील, एसिड, वैट, कार्बनिक रंगद्रव्य, प्रत्यक्ष रंगों और विभिन्न डाई इंटरमीडिएट्स के वैश्विक आपूर्तिकर्ता के रूप में उभरा है। डाइस्टफ उद्योग में, भारतीय उद्योग एशिया में दूसरे स्थान पर है। इसका हिस्सार विश्व बाजार का 16% है।

6. कीटनाशक उद्योग

रसायन, उर्वरक और कीटनाशकों ने "1960 और 1970 के दशक के दौरान हरित क्रांति" में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कृषि रसायन के भारतीय निर्यात ने पिछले पांच वर्षों में एक प्रभावी वृद्धि देखी है। संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, नीदरलैंड्स, बेल्जियम, स्पेन, दक्षिण अफ्रीका, बांग्लादेश, मलेशिया और सिंगापुर इसके प्रमुख निर्यात गंतव्य बाजार हैं।

भारत दुनिया में सबसे गतिशील जेनेरिक कीटनाशक निर्माताओं में से एक है, जहां इस देश में 45 से अधिक तकनीकी ग्रेड कीटनाशकों का निर्माण किया जा रहा है। बहुराष्ट्री य कंपनियों सहित बड़े और मध्यम पैमाने के क्षेत्र में शामिल 32 कंपनियां तकनीकी कीटनाशकों के निर्माण में लगी हुई हैं। देश भर में फैले कई कीटनाशक फॉर्मूलेटर्स हैं और भारत संयुक्त राज्य अमेरिका, जापान और चीन के बाद कृषि रसायन का चौथा सबसे बड़ा उत्पादक देश है। यह उद्योग शुद्ध निर्यात संबंधी कमाई करने वाला है और देश की विदेशी मुद्रा बास्केहट में महत्वपूर्ण योगदान देता है।

7. विशुद्ध और विशिष्टश रसायन

भारत भी बड़ी संख्या में विशुद्ध और विशिष्ट रसायनों का भी उत्पादन करता है, जिनका अनेक विशिष्टतापूर्ण उपयोग होता है और वो औद्योगिक उत्पादन में वृद्धि के लिए आवश्यक हैं। इनका खाद्य योजक और रंगद्रव्य, पॉलीमर योजक, रबर उद्योग में एंटी-ऑक्सीडेंट आदि के रूप में व्यापक उपयोग किया जाता है।

8. डी लाइसेंस प्राप्त और विनियमित उद्योग

रसायन क्षेत्र में आरबीआई के माध्यम से ऑटोमेटिक रूट के तहत 100% एफडीआई की अनुमति है। कार्बनिक/अकार्बनिक डाइस्टफ और कीटनाशकों को कवर करने के साथ-साथ अधिकांश रासायनिक उत्पादों का उत्पानदन लाइसेंस-मुक्तो है। उद्यमियों को औद्योगिक नीति और संवर्धन विभाग के पास केवल उद्योग उद्यमी ज्ञापन (आईईएम) जमा करने की आवश्यकता है, बशर्ते कि प्रोजेक्ट का स्थान, महानगरीय शहरों और नगर निगम वाले शहरों के मानक शहरी क्षेत्र की सीमाओं के बाहर आता हो। केवल निम्नलिखित आइटम अपनी खतरनाक प्रकृति की वजह से जैसा कि अंतर्राष्ट्री य कन्वें शन्सी द्वारा अपेक्षित है अनिवार्य लाइसेंसिंग सूची में शामिल हैं।

  • हाइड्रोकायनिक एसिड और इसके डेरिवेटिव्सं
  • फॉस्जीन और इसके डेरिवेटिव्स
  • हाइड्रोकार्बन के आइसोकायनेट्स और डी-आइसोकायनेट्स

9. विदेशी प्रौद्योगिकी वाले समझौते

भारत में विदेशी प्रौद्योगिकी वाले समझौते भारतीय उद्योगों में प्रौद्योगिकी के विकास में सहायक हैं। विदेशी प्रौद्योगिकी को विदेशी स्रोतों, जैसे अनुसंधान और विकास एजेंसियों, विदेशी पैरेंट कंपनियों और अन्य निर्माताओं से भारतीय कंपनियों को स्थानांतरित किया जाता है। विदेशी प्रौद्योगिकी का हस्तांतरण विदेशी प्रत्यक्ष निवेश और विदेशी प्रौद्योगिकी सहयोग समझौतों के माध्यम से होता है।

भारत में विदेशी प्रौद्योगिकी वाले समझौते सरकारी मंजूरी या आरबीआई द्वारा दिए गए ऑटोमेटिक रूट के माध्यम से, प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण का रास्तार खोलते हैं।

  • आरबीआई विदेशी प्रौद्योगिकी संबंधी समन्वमय के लिए भारतीय उद्योग को अपने क्षेत्रीय कार्यालयों के माध्यम से स्वत: अनुमोदन प्रदान करता है।
  • प्रौद्योगिकी हस्तांतरण से संबंधित भुगतान यूएस $2 मिलियन से अधिक की नहीं होनी चाहिए।
  • घरेलू बिक्री के मामले में भुगतान की जाने वाली रॉयल्टी 5% तक, निर्यात के मामले में 8% तक सीमित है और कुल भुगतान 10 वर्षों की अवधि के लिए बिक्री पर 8% होनी चाहिए।
  • रॉयल्टी अवधि व्यापार शुरू करने की तारीख से 7 साल से अधिक नहीं होनी चाहिए या समझौते पर हस्ताक्षर करने की तारीख से 10 साल से अधिक नहीं होनी चाहिए।

10. सीमा शुल्क

अधिकांश बिल्डिंग ब्लॉक और फीडस्टॉक के लिए, मूल सीमा शुल्क 5% (एथिलीन, प्रोपेलीन, क्रूड, नेफ्था, बेंजीन, टोल्यून, जाइलीन, एथाइल बेंजीन) है। डाइस्टफ सेगमेंट पर मूल सीमा शुल्क 10% है। कीटनाशकों पर मूल सीमा शुल्क 7.5% है।

11. वस्तु एवं सेवा कर

लगभग सभी रसायनों, डाइस्टफ और कीटनाशकों पर जीएसटी दर 12% है।