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पेट्रोकेमिकल्स के बारे में

अवलोकन

पेट्रोरसायन विभिन्न रासायनिक यौगिकों से, मुख्य रूप से हाइड्रोकार्बन से प्राप्त होते हैं। ये हाइड्रोकार्बन कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस से व्युत्पन्न होते हैं। कच्चे तेल के आसवन द्वारा उत्पादित विभिन्न अंशों में से, पेट्रोलियम गैसे, नेफ्था, केरोसिन और गैस तेल पेट्रोरसायन उद्योग के लिए मुख्य फ़ीड स्टॉक हैं। प्राकृतिक गैस से प्राप्त ईथेन, प्रोपेन और प्राकृतिक गैस तरल पदार्थ पेट्रोरसायन उद्योग में उपयोग किए जाने वाले अन्य महत्वपूर्ण फीडस्टॉक हैं। पेट्रोरसायन उद्योग आर्थिक विकास और विनिर्माण क्षेत्र के विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पेट्रोरसायन उद्योग में मूल्यवर्धन अन्य उद्योग क्षेत्रों से अधिक है।

1970 के दशक में भारतीय औद्योगिक दृश्य में प्रवेश करने वाले पेट्रोरसायन उद्योग ने 1980 और 1990 के दशक में तेजी से वृद्धि दर्ज की। पेट्रोरसायन उद्योग में मुख्य रूप से सिंथेटिक फाइबर/यार्न, पॉलिमर, सिंथेटिक रबर (इलास्टोमर), सिंथेटिक डिटर्जेंट इंटरमीडिएट्स, परफार्मेंस प्लास्टिक और प्लास्टिक प्रसंस्करण उद्योग शामिल हैं।

आज, पेट्रोरसायन उत्पाद दैनिक उपयोग वस्तुओं के पूरे स्पेक्ट्रम में पैठ करते हैं और कपड़ों, आवास, निर्माण, फर्नीचर, ऑटोमोबाइल, घरेलू सामान, कृषि, बागवानी, सिंचाई, पैकेजिंग, चिकित्सा उपकरण, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्री कल आदि जैसे जीवन के लगभग हर क्षेत्र को कवर करते हैं।

वर्तमान में प्रति वर्ष लगभग 7.05 मिलियन टन की संयुक्त ईथिलीन क्षमता के साथ ग्यारह नेफ्था और/या/दोहरी फ़ीड क्रैकर परिसर प्रचालन में है। इसके अलावा, छ: एरोमेटिक काम्पखलेक्सक प्रचालन में है जिनकी संयुक्त/ जाइलीन क्षमता लगभग 5.5 मिलियन टन है। 2012-13 से 2016-17 के दौरान प्रमुख पेट्रोरसायनों का उत्पादन प्रदर्शन इस प्रकार है:

उप- समूह 2012-13 2013-14 2014-15 2015-16 2016-17
सिंथेटिक फाइबर्स 3124 3144 3527 3554 3595
पॉलिमर 7509 7876 7558 8839 9163
एलिस्टोमर (एस रबर) 96 105 172 242 285
सिंथ डिटर्जेंट इंटरमीडिएट्स 627 597 596 566 664
परफार्मेंस प्लास्टिक 1691 1685 1591 1700 1799
कुल 13047 13406 13443 14900 15506
(स्रोत: एस एंड एम डिवीजन)

डाउनस्ट्रीम पेट्रोरसायन प्रोसेसिंग सेक्टर

वर्ष 2017-18 के लिए वर्जिन ग्रेड पॉलिमर की वार्षिक खपत 15.9 मिलियन टन थी। भारत में प्लास्टिक की मांग पिछले 4 वर्षों (2013-14 से 2017-18) के लिए वर्तमान में 8.9% की औसत दर से बढ़ रही है। इसके 2022-23 तक 24 मिलियन टन और 2027-28 तक 35 मिलियन टन तक पहुंचने की उम्मीद है।

संगठित और असंगठित क्षेत्र में लगभग 50,000 से अधिक प्रसंस्करण इकाइयां हैं (लगभग 33,500 संगठित सेगमेंट में हैं) जिसमें प्लास्टिक उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला के उत्पादन के लिए 1,53,500 प्लास्टिक प्रसंस्करण मशीनें हैं। प्रसंस्करण क्षमता प्रति वर्ष 45.1 मिलियन टन होने का अनुमान है। पिछले 4 सालों में यह प्रसंस्करण क्षमता 8.8% सीएजीआर की दर से बढ़ रही है और प्रसंस्करण उद्योग से अगले 5 वर्षों में 62.4 मिलियन टन और 2027-28 तक 86 मिलियन टन की क्षमता बढ़ाने के लिए 10 अरब डॉलर निवेश करने की उम्मीद है।

उत्पाद

II. उत्पाद समूहों

II.1. बिल्डिंग ब्लॉक्स का विनिर्माण

  • डाउनस्ट्रीाम प्रोसेसिंग के साथ नेफ्था/गैस क्रैकर; इथिलीन, प्रोपीलीन, ब्यू्टाडीन आदि का उत्पादन करेंगे।
  • एरोमेटिक काम्पअलेक्सस: बेंजीन, टोलुइन और ज़िलीन का उत्पादन करेंगे।

II.2. बिल्डिंग ब्लॉक

  • पॉलिमर (एलडीपीई, एलएलडीपीई, एचडीपीई, पीपी, पीवीसी, पॉलीस्टीरिन, एबीएस, इंजीनि
  • पॉलिमर, परफार्मेंस पॉलिमर इत्यादि) और इंटरमीडिएट्स (ईडीसी / वीसीएम, स्टायरिन इत्यादि)
  • सिंथेटिक फाइबर इंटरमीडिएट (एसीएन, डीएमटी, पीटीए, कैप्रोलैक्टम, एमईजी) के लिए
  • एलिस्टोमर (एसबीआर, पीबीआर, एनबीआर, ब्यूटिल रबड़ इत्यादि)
  • सर्फैक्टेंट इंटरमीडिएट्स। (एलएबी, ईओ आदि)
  • अन्य पेट्रोरसायन (सॉल्वैंट्स, मूल और साथ ही मध्यवर्ती रसायनों)

II.3. फाइबर इंटरमीडिएट से सिंथेटिक फाइबर तक (पीएसएफ, पीएफवाई, एनएफवाई, एनआईवाई, एएफ आदि)

II.4. पॉलिमर से प्लास्टिक प्रसंस्कृकत सामानो तक

नीति

III.1 औद्योगिक नीति

24 जुलाई, 1991 को घोषित नई औद्योगिक नीति निम्नलिखित शर्तों के अधीन लाइसेंसिंग आवश्यकताओं से औद्योगिक उपक्रमों को छूट है।

विनिर्माण के प्रस्तावित सामान निम्नैलिखित में शामिल नहीं हैं:

  • सार्वजनिक क्षेत्र के लिए आरक्षित वस्तुओं की सूची;
  • अनिवार्य लाइसेंसिंग के अधीन वस्तुओं की सूची;
  • लघु उद्योग क्षेत्र के लिए आरक्षित वस्तुओं की सूची।

प्रस्तावित परियोजना 1991 की जनगणना के अनुसार 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहर की मानक शहरी क्षेत्र की सीमा के 25 किमी के भीतर स्थित नहीं है। यह शर्त लागू नहीं होगी, बशर्ते ये 25 जुलाई, 1991 से पहले राज्य सरकार द्वारा "औद्योगिक क्षेत्र" के रूप में नामित क्षेत्र के भीतर स्थित हों। यदि इकाई प्रतिबंधित स्थान पर स्थित होने का प्रस्ताव है तो औद्योगिक लाइसेंस प्राप्त करना पड़ सकता है।

निम्नलिखित पेट्रोरसायन के लिए, औद्योगिक लाइसेंस की आवश्यकता है:

  • 281119.01 हाइड्रो साइनिक एसिड और इसके डेरिवेटिव। {इसमें आर्सीलोनिट्रियल (एसीएन), मेथिल मेथा एक्रिलेट (एमएमए) और पॉली मेथिल मेथा एक्रिलेट (पीएमएमए) इत्यादि शामिल हैं}।
  • 281210.01 फॉस्जीन और इसके डेरिवेटिव्स। (इसमें पॉली कार्बोनेट शामिल है)
  • 292910.09 हाइड्रोकार्बन के आइसोसिनेट और डी-आइसोसाइनेट्स जिन्हेंै कहीं और निर्दिष्ट नहीं किया गया है (उदाहरण मेथिल आइसोसाइनेट)।

III.2 विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) नीति

विदेशी प्रत्यक्ष निवेश को सरल बनाने के लिए प्रक्रिया को सरल बनाया गया है। पेट्रोरसायन आइटम/गतिविधियां 100% तक एफडीआई/एनआरआई/ओसीबी निवेश ऑटोमेटिक अप्रूवल रूट के तहत आती हैं।

III.3 कस्टम टैरिफ के तहत परियोजना आयात

कस्टतम्स टेरिफ एक्ट , 1975 के अध्याय 98.01 के तहत पूंजीगत वस्तुओं के आयात की अनुमति 20% शुल्कत की मानक दर और अन्य लागू शुल्कोंअ पर है)। ये प्रावधान सामानों के निम्निलिखित विवरण की अनुमति देते हैं:

"प्राइम मूवर्स, यंत्र, एपरेटस और एप्ला इऐंज, कंट्रोल गियर और ट्रांसमिशन उपकरण, सहायक उपकरण (इसमें वे भी शामिल हैं जिनकी आवश्य कता अनुसंधान और विकास उद्देश्यों तथा टेस्टिं ग व क्वाइलिटी कंट्रोल के लिए है) सहित मशीनरी के सभी सामान के साथ-साथ उक्तट मदों और उनके घटको के विनिर्माण के लिए सभी घटक (वे चाहे तैयार हों या तैयार न हों) या कच्चा माल जिसकी आवश्यककता किसी विशेष औद्योगिक संयंत्र की किसी यूनिट की प्रारंभिक स्था-पना या किसी मौजूदा यूनिट के विस्ताार के लिए है।

ओलेफिनिक काम्पकलेक्स

वर्तमान में नीचे दिए गए अनुसार 7.05 मिलियन टन प्रति वर्ष की संयुक्त ईथिलीन क्षमता के साथ ग्यारह क्रैकर्स हैं:

नेफ्था क्रैकर्स इथिलीन क्षमता (एमटीएस)
रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड, वडोदरा, गुजरात 1,75,000
रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड, हजीरा, गुजरात 8,87,000
हल्दिया पेट्रोरसायन लिमिटेड, हल्दिया, पश्चिम बंगाल 7,00,000
इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड, पानीपत, हरियाणा 8,00,000
उप-योग 25,62,000
प्राकृतिक गैस क्रैकर्स
रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड, नागोताने, महाराष्ट्र 4,21,400
गैस अथॉरिटी ऑफ लिंडिया लिमिटेड, पाटा, यूपी 8,50,000
रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड, दहेज, गुजरात 4,00,000
उप-योग 16,71,400
ड्यूल फ़ीड क्रैकर्स
ब्रह्मपुत्र क्रैकर और पॉलिमर लिमिटेड (बीसीपीएल) 2,13,100
ओएनजीसी पेट्रो एडिशंस लिमिटेड (ओपेल) * 11,00,000
उप- योग 13,13,100
ऑफ गैस क्रैकर
रिलायंस गैस इंडस्ट्री , जामनगर 15,00,000
उप- योग 15,00,000
योग 70,46,500

परिप्रेक्ष्य योजना

पीसीपीआईआर नीति के एक हिस्से के रूप में घरेलू उत्पादन क्षमताओं को बढ़ावा देने के लिए, मौजूदा और निष्पादन अधीन क्षमताओं को ध्यान में रखते हुए मांग आपूर्ति परिदृश्य का अध्ययन करने के लिए पेट्रोरसायन उद्योग के लिए परिप्रेक्ष्य योजना शुरू की गई है। अगले 15 से 20 वर्षों के दौरान पेट्रोरसायन की मांग और आपूर्ति के मुद्दों की जांच करने और सरकार को नीति विकल्पों , जिसमें सरकार की मौजूदा पीसीपीआईआर योजना में संशोधन के संबंध में सिफारिशें शामिल हैं, की सिफारिश करने के लिए सचिव, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय और सचिव, रसायन एवं पेट्रोरसयन विभाग की सह-अध्यक्षता में एक समिति गठित की गई है। एक रोडमैप तैयार करने के लिए इस संबंध में समिति की चार बैठकें आयोजित की गई हैं।

अवसर

पेट्रोरसायन में अवसर

1991 में शुरू हुए आर्थिक सुधारों ने घरेलू पेट्रोरसायन उद्योग में महत्वपूर्ण बदलाव लाए। डिलाइसेंसिंग और डिरेगुलेशन ने बाजार बलों को निवेश और विकास को निर्धारित करने की अनुमति दी। अब यह वैश्विक स्तर पर स्थापित है कि डाउनस्ट्रीम प्लास्टिक सामानों में इथलीन (जो पेट्रोरसायनों के लिए मुख्यस बिल्डिंाग ब्लॉ्क है) खपत और पॉलिमर खपत का सकल घरेलू उत्पाद (सकल घरेलू उत्पाद) के विकास के साथ मजबूत सहसंबंध है। पॉलिमर खपत में मजबूत वैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंकेज है और पॉलिमर खपत में वृद्धि जीडीपी विकास पर गुणक प्रभाव डालती है।

वर्ष 2017-18 के लिए वर्जिन ग्रेड पॉलिमर की वार्षिक खपत 15.9 मिलियन टन थी। भारत में प्लास्टिक की मांग पिछले 4 वर्षों (2013-14 से 2017-18) के लिए वर्तमान में 8.9% की औसत दर से बढ़ रही है। यह 2022-23 तक 24 मिलियन टन तक पहुंचने और 2027-28 तक 35 मिलियन टन तक पहुंचने की उम्मीद है। संगठित और असंगठित क्षेत्र में लगभग 50,000 से अधिक प्रसंस्करण इकाइयां हैं (लगभग 33,500 संगठित सेगमेंट में हैं) जिसमें प्लास्टिक उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला के उत्पादन के लिए 1,53,500 प्लास्टिक प्रसंस्करण मशीनें हैं। प्रसंस्करण क्षमता प्रति वर्ष 45.1 मिलियन टन होने का अनुमान है। पिछले 4 सालों में यह प्रसंस्करण क्षमता 8.8% सीएजीआर की दर से बढ़ रही है और प्रसंस्करण उद्योग से अगले 20 वर्षों में 2027-28 तक 62.4 मिलियन टन की क्षमता बढ़ाने के लिए $ 10 बिलियन का निवेश करने की उम्मीद है।

विजन

घरेलू पेट्रोरसायन उद्योग की संभावना को ध्यान में रखते हुए और उत्पादन और मांग में वैश्विक बदलाव द्वारा प्रदान किए गए विकास के अवसरों को देखते हुए पेट्रोरसायन क्षेत्र की परिकल्पना है

  • पर्यावरण अनुकूल प्रक्रियाओं और प्रौद्योगिकियों का उपयोग करके विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी कीमतों पर मूल्यवर्धित, गुणवत्ता पेट्रोरसायन उत्पादों का विकास।
  • सतत विकास पर ध्यान केंद्रित करने के साथ नए अनुप्रयोगों और उत्पादों का नवाचार।

पेट्रोरसायन को खाद्य और जल सुरक्षा, आश्रय, कपड़े और वस्त्र, स्वास्थ्य देखभाल, सामाजिक और भौतिक आधारभूत संरचना, सूचना, संचार और मनोरंजन के क्षेत्र में हमारी मूलभूत आवश्यकताओं के समाधान के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभानी है।

प्लास्टिक उद्योग के लिए जोरदार क्षेत्रों में प्लास्टिक कल्च र के माध्यम से आधुनिक खेती, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों और उपभोक्ता गैर-टिकाऊ वस्तुओं के लिए पैकेजिंग, ऑटोमोबाइल और उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं के लिए बेहतर परफार्मिंग प्लास्टिक, लागत प्रभावी प्लास्टिक के माध्यम से आधारभूत संरचना विकास और दूरसंचार और सूचना प्रौद्योगिकी सेवाओं के क्षेत्र के लिए अभिनव उत्पाद शामिल हैं।

सिंथेटिक फाइबर में भविष्य के विकास के क्षेत्र पॉलिएस्टर फाइबर और यार्न, और एक्रिलिक फाइबर में हैं। परफार्मेंस फाइबर सहित तकनीकी वस्त्रों में वृद्धि के लिए भी पर्याप्त क्षमता है।

सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ प्लास्टिक्स इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (सीआईपीईटी) के समर्थन के साथ पॉलिमर एंड प्लास्टिक्स के क्षेत्र में अनुसंधान और विकास और मानव संसाधन योजना और विकास को बढ़ावा देने के माध्यम से विजन प्राप्ति किया जाना है।